पैदल आदमी कविता रघुवीर सहाय। तार सप्तक के कवि। raghuveer sahay prgtiwad

पैदल आदमी

रघवीर सहाय Raghuveer shaay

 

 

जब सीमा के इस पार पड़ी थी लाशें 

तब सीमा के उस पार पड़ी थीं लाशें 

सिकुड़ी ठिठरी नंगी अनजानी लाशें 

वे उधर से इधर आ करके मरते थे 

या इधर से उधर जा करके मरते थे 

यह बहस राजधानी में हम करते थे 

हम क्या रुख लेंगें यह इस पर निर्भर था 

किसका मरने से पहले उनको डर था 

भुखमरी के लिए अलग अलग अफ़सर था 

इतने में दोनों प्रधानमंत्री बोले 

हम दोनों में इस बरस दोस्ती हो ले

यह कहकर दोनों ने दरवाजे खोले 

परराष्ट्र मंत्रियों ने दो नियम बताये 

दो पारपत्र उसको जो उड़कर आये 

दो पारपत्र उसको जो उड़कर जाये 

पैदल को हम केवल तब इज्जत देंगे

जब दे करके बंदूक उसे भेजेंगे 

या घायल से घायल अदलबदलेगे

पर कोई भूखा पैदल मत आने दो 

मिटटी को मत मिल जाने दो 

वरना दो सरकारों का जाने क्या हो  

 

hindi poem ” aam aadmi “

कविता की व्याख्या / सार

  • पैदल आदमी आम आदमी का प्रतीक है। साधारण आदमी ही सेना का जवान होता है। युद्ध के मैदान में वह आम आदमी ही होता है।
  • राजधानी में बैठकर राजनेता कोई भी निर्णय लेते हैं अथवा बनाते हैं उनके इशारे पर यह सैनिक कार्य करते हैं।
  • हमारी संवेदना सैनिक के साथ नहीं होती केवल हम संख्या गिनते हैं कि अपने कितने सैनिक मरे और उनके सैनिक कितने मरे।
  • आम आदमी जैसे समाज में मरता है उसी प्रकार युद्ध में भी मरता है।
  • सत्ता वर्ग हमेशा मौजूद रहता है जो शोषक वर्ग का प्रतिनिधि है। यह सत्ता वर्ग युद्ध के मैदान में स्वयं नहीं जाता , बल्कि एक आम आदमी का प्रयोग करता है , और अपनी धाक जमता है चाहे उधर से 50 सैनिक मरे या इधर से 10 सैनिक मरे किंतु उन 60  परिवारों का दुख एक सा ही होगा। उसमें कोई कमी नहीं है परंतु राजनेता के लिए यह केवल संख्या तक सीमित है।
  • उनका दुख राजनेताओं के लिए कोई मायने नहीं रखता वह शोक के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाकर जनता की संवेदना बटोरना चाहते हैं।
  • एक आम आदमी के मरने से सत्ता वर्ग के लोगों को फर्क नहीं पड़ता। और युद्ध हो या ना हो यह निर्णय भी राजनेता ही करते हैं
  • जिस प्रकार अशोक युद्ध में स्वयं जाता था और संवेदना ग्रहण करता था उस प्रकार राजनेता नहीं करते। यही विडंबना है वह युद्ध का निर्णय लेते हैं राजनेताओं के घर से भी कोई सैनिक नहीं होता।
  • अगर इन राजनेताओं के घर से भी सैनिक होता और वह युद्ध में भाग लेता तो इन राजनेताओं को भी वास्तविकता का अंदाजा होता।
  • दोनों देश के प्रधानमंत्री आपस में दोस्ती करते हैं इतने में युद्ध रुक जाता है।
  • केवल इसके लिए कि आपस में रिश्ते बने रहें यह यात्रा केवल उच्च वर्ग ही कर सकता है , साधारण व्यक्ति के लिए केवल शोषण ही उसका भाग्य है।
  • पैदल आदमी तभी याद आता है जब वह युद्ध करने जाता है या उसकी अदला-बदली करनी पड़ती है। यदि आम आदमी स्वेच्छा से आने जाने लगे तो देश की सीमाएं टूट जाएगी। यही कारण है कि राजनेता ने देश का विभाजन किया अपनी इच्छा पूर्ति अपने स्वार्थ और राजनीति के लिए है
  • यदि यह जनता आपस में मिल गई तो जाने सरकार का क्या होगा इसलिए इनको एक मत होने दो इसके बीच वैमनस्य चलने दो यही भाव राजनेता के मन में हमेशा रहता है।

 

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भारत दुर्दशा का रचना शिल्प
ध्रुवस्वामिनी राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक चेतना।

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