फार्स हिंदी रंगमंच फार्स क्या है हिंदी नाटक से सम्बन्ध विस्तृत जानकारी hindi rngmanch

फार्स हिंदी रंगमंच की पूरी जानकारी पाने के लिए ये पोस्ट पूरा पढ़ें |

फार्स हिंदी रंगमंच।

फार्स –

  • फार्स ‘लेटिन’ धातु का शब्द है , जिसका अर्थ है किसी चीज के बीच में कोई चीज भर देना।
  • फार्स में कॉमिक (विनोदात्मक) दृश्यों की योजना की जाती है ,फार्स नाटक का वह रूप होता है जिसमें हंसी मजाक होता है।यह एक स्वतंत्र नाट्य विधा के रूप में विकसित हुआ और ऐसी नाट्य रचना है जिसका प्रदर्शन दर्शकों को हंसी – मजाक से लोटपोट करना है , इसमें छिछले संवाद होते हैं। जिसका एक प्रकार से हीन कोटी की सुखांतकी का रूप होता है।
  • फार्स में मानसिक विसंगतियों या मूर्खताभरी शारीरिक क्रियाओं , छिछले स्तर की चतुरी , भद्दी रसिकता  और हास्यास्पद स्थितियों का चित्रण ही प्रमुख होता है।
  • फार्स में सार्थक प्रयोजनशीलता का लक्ष्य नहीं होता नहीं होता। न ही चरित्र – चित्रण अथवा वस्तु योजना की कलात्मक दृष्टि होती है।
  • नाटककार को केवल हास्यास्पद प्रसंगों कि उद्भावना करनी होती है।
    जब समाज का स्तर गिर जाता है , छिछलापन बढ़ जाता है , छिन्न – भिन्न हो जाता है , तब फार्स नाटक विधा समाज का मनोरंजन कर उसका उपकार करता है।
  • डाइडन ने सुखांतकी व प्रहसन के लेखकों की तुलना चिकित्सक व नीम – हकीम वैध से की है , जो एक विश्वसनीय कार्य करता है , तो दूसरा प्रयास खतरे में डालने वाला होता है।
  • फार्स से दर्शक विकृतियों के रास्ते पर चलने लगता है , क्योंकि फार्स नाटक लोगों को जल्दी वशीभूत कर लेता है।
  • अन्य नाटक में दृश्य योजना , संवाद , सार्थकता , कलात्मक , सूझबूझ की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन फार्स में इनकी कोई योजना नहीं की जाती , इसका कार्य केवल दर्शक को मनोरंजन करने का प्रयत्न होता है।
  • फार्स केवल हास्यास्पद स्थितियों को मानसिक विकृतियों को दिखलाने के रूप में अथवा शारिक विकृतियों का मजाक उड़ाया जाता है।
  • दर्शक को हंसाया जाता है , फार्स का उद्देश्य हास्य प्रदर्शन करना होता है। जिसका कथानक निरर्थक वार्तालाप और अनर्गल संवाद , के रूप में प्रकट होता है। उसमें मानसिक कुरूपता व्यंजक क्रियाएं व्यक्त होती है।
  • पात्रों में अशिष्टता , दुश्शीलता का गुण फार्स में मिलता है। यह केवल मूर्खतापूर्ण ढंग से केवल हंसाने का कार्य करता है। इसमें हास्य उत्पत्ति अनेक प्रकार से की जाती है। जैसे शारिक स्थूलता को दिखाकर , मध्य पान और भोजन प्रथा के प्रति अतिरिक्त वासनाओ का लगाओ दिखलाकर फार्स का कथानक बुना जाता है।
  • लोक जीवन के हर स्तर की विकृतियों को लक्षित करके इस नाटक को लिखा जाता है। गृहस्थ जीवन की विकृत और विसंगति की झलक मिलती है तो सामाजिक राजनीतिक व्यंग्य के द्वारा विकृति को उभारने का प्रयत्न किया जाता है।
  • इसकी वस्तु योजना और अंकात्मक होती है। चरित्र – चित्रण भी हंसने के लिए आधार बनाता है।फार्स का मानवीय भावों को ऐसे बनाता है जैसे – क्रोध , गर्व , अहंकार , लोक , पाखंड , प्रकाशित होता है।
  • उन्होंने चरित्र प्रधान फार्स के माध्यम से जितना हंसाया उतना अन्य घटना प्रसंग से नहीं।
  • चरित्र – प्रधान प्रहसन मानव हृदय की जटिलताओं को उजागर कर , विनोद का संचार करना , हास्य प्रस्तुत करने का प्रयास करता है।
  • चरित्र प्रधान फार्स दर्शक के हृदय को अधिक छूते हैं। उनके माध्यम से अपने अंदर की विकृतियों को देखकर हंसी आ जाती है।
  • कथोकथन में हास्य उत्पन्न करने की अनेक विधियां होती है , जैसे  – अनर्गल बातों को प्रकट करते हुए , किसी से बात करना , वार्तालाप करते हुए , उच्चारण में उलट-फेर करते हुए , कथन का परिहासात्मक बना देना आदि।
  • कथोकथन के साथ शारीरिक हरकतों को संलग्न करके भी हास्य उत्पत्ति की जाती है , जैसे – सिर हिला कर सहमति या असहमति जाहिर करना आदि।
  • फार्स में दृश्य योजना आदि का कोई विशेष प्रयोजन नहीं होता। सामान्यता विसंगत जीवन के वातावरण के लिए परिवेश को उद्घाटित करने के लिए दृश्य वेशभूषा आदि की योजना की जाती है।
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