रूपक और उपरूपक के भेद और अंतर

रूपक और उपरूपक के भेद और अंतर   प्रश्न – रूपक और उपरूपक में अंतर स्पष्ट करते हुए , रूपक के किन्ही पांच भेदों का विवेचन कीजिए – उत्तर – ( पाठक के लिए नोट यहाँ हम संक्षेप में आपको रूपक अर्थात नाटक के 10 भेद उदहारण सहित लिख रहे हैं आप इस…

निर्देशक के कार्य director , nirdeshak

निर्देशक के कार्य और भूमिका प्रस्तुतीकरण का मूल संयोजक निर्देशक होता है। रंग निर्देशन बहुत महत्वपूर्ण कार्य माना जाता है। निर्देशक नाटक के प्रस्तुतीकरण का प्रमुख रंगकर्मी होता है। नाटककार जिस नाटक को शब्दों में आकार देता है , निर्देशक उसी का रंगमंचीय आलेख तैयार करता है। नाटक के प्रस्तुतीकरण के…

रूपक और उपरूपक में अंतर

रूपक और उपरूपक में अंतर – rupak aur uprupak me antar | रूपक और उपरूपक में अंतर   रूपक और उपरूपक नाटक या अभिनय करने वाला (नट) रंगशाला में नटों की आकृति , हाव-भाव वेश और वचन आदि द्वारा घटनाओं का प्रदर्शन किया जाता है। वह दृश्य जिसमे स्वांग के द्वारा…

साधारणीकरण उत्त्पतिवाद अनुमितिवाद भुक्तिवाद अभिव्यक्तिवाद

साधारणीकरण , उत्त्पतिवाद , अनुमितिवाद , भुक्तिवाद , अभिव्यक्तिवाद। साधारणीकरण का सामान्य अर्थ है असाधारण को साधारण कर देना अथवा हो जाना। रस का सूत्र धारक भरतमुनि थे जिन्होंने ” विभावानुभावसंचारीसंयोगद्रसनिष्पत्ति ” की विवेचना की थी।   साधारणीकरण के चार व्याख्याकार हुए हैं – १ भट्ट्लोलट २ श्री शंकुक ३ भट्नायक…

भारतीय नाट्य सिद्धांत bhartiya naatya siddhant

भारतीय नाट्य सिद्धांत की पूरी जानकारी हेतु यह पोस्ट पढ़ें | भारतीय नाट्य सिद्धांत   रस ( नोट – यह नोट्स संक्षेप में विंदुवार लिखा जा रहा है विस्तृत रूप से अध्ययन करने के लिए ” नाटक रंगमंच ” कैटेगरी में देखें )   प्राचीन काव्य शास्त्र के अनुसार आरंभ…

त्रासदी नाटक रंगमंच traasdi natak rangmanch

त्रासदी नाटक रंगमंच की पूरी जानकारी नोट्स के रूप में आपको नीचे दी जा रही है | त्रासदी नाटक रंगमंच   त्रासदी नाटक क्या है उसके कितने तत्व हैं ? त्रासदी नाटक के तत्व यूनानी रंगमंच की एक महत्वपूर्ण नाट्य अभिव्यक्ति का रूप त्रासदी नाटक है। इस नाटक में किसी…

त्रासदी नाटक क्या है trasdi natak kya hai

त्रासदी नाटक फुल हिंदी नोट्स स्टूडेंट्स के लिए तैयार किया गया है | त्रासदी नाटक संक्षेप परिचय अरस्तु ने अपने ग्रंथ में नाटकों पर विशेषकर त्रासदी नाटक पर बहुत विस्तार से विवेचन किया है। अरस्तु ने त्रासदी और कौमदी नामक दो भेद माने हैं. अरस्तु  के अनुसार नाटक काव्य का वह रूप है…

विरेचन सिद्धांत संछिप्त नोट्स virechan notes

विरेचन सिद्धांत संछिप्त नोट्स ( full hindi notes ) विरेचन सिद्धांत Virechan Sidhant अरस्तु का विरेचन सिद्धांत  – प्रसिद्ध आलोचक लेसिंग विरेचन से अरस्तु का अभिप्राय प्रेक्षक के नैतिक सुधार से है। दुखांतकियों में अभिव्यक्त करुणा और भय के दृश्यों को देखने के पश्चात मनुष्य अपने नैतिक जीवन के प्रति अधिक जागरूक…

ध्रुवस्वामिनी राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक चेतना। jayshankr prsad ke natak

jayshankr prsad ke natak dhruvswamini   राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक चेतना ध्रुवस्वामिनी नाटक में प्रसाद जी ने राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक चेतना का उत्कृष्ट रूप प्रस्तुत किया है। इतिहास से कथावस्तु का आधार ग्रहण करते हुए अतीत पर वर्तमान का चित्र प्रस्तुत करने मे सिद्धस्त  नाटक शिल्पी माने जाते हैं। प्रसाद जी भारत के…

ध्रुवस्वामिनी की पात्र योजना।Dhruvswamini jayshankar prsad | नाटक के पात्र

ध्रुवस्वामिनी की पात्र योजना Hindi notes । Dhruvswamini jayshankar prsad | नाटक के पात्र ध्रुवस्वामिनी की पात्र योजना     पात्र योजना की दृष्टि से भी ध्रुवस्वामिनी एक सफल नाट्य कृति मानी जा सकती है। ध्रुवस्वामिनी नाटक प्रसाद के नाटकों की तुलना में अपेक्षाकृत काम है। इस नाटक के प्रमुख पुरुष पात्र…