पैदल आदमी कविता रघुवीर सहाय। तार सप्तक के कवि। raghuveer sahay prgtiwad

पैदल आदमी रघवीर सहाय Raghuveer shaay     जब सीमा के इस पार पड़ी थी लाशें  तब सीमा के उस पार पड़ी थीं लाशें  सिकुड़ी ठिठरी नंगी अनजानी लाशें  वे उधर से इधर आ करके मरते थे  या इधर से उधर जा करके मरते थे  यह बहस राजधानी में हम…

ध्रुवस्वामिनी राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक चेतना। jayshankr prsad ke natak

jayshankr prsad ke natak dhruvswamini   राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक चेतना ध्रुवस्वामिनी नाटक में प्रसाद जी ने राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक चेतना का उत्कृष्ट रूप प्रस्तुत किया है। इतिहास से कथावस्तु का आधार ग्रहण करते हुए अतीत पर वर्तमान का चित्र प्रस्तुत करने मे सिद्धस्त  नाटक शिल्पी माने जाते हैं। प्रसाद जी भारत के…

ध्रुवस्वामिनी की पात्र योजना।Dhruvswamini jayshankar prsad | नाटक के पात्र

ध्रुवस्वामिनी की पात्र योजना Hindi notes । Dhruvswamini jayshankar prsad | नाटक के पात्र ध्रुवस्वामिनी की पात्र योजना     पात्र योजना की दृष्टि से भी ध्रुवस्वामिनी एक सफल नाट्य कृति मानी जा सकती है। ध्रुवस्वामिनी नाटक प्रसाद के नाटकों की तुलना में अपेक्षाकृत काम है। इस नाटक के प्रमुख पुरुष पात्र…

ध्रुवस्वामिनी तथ्य एवं शिल्प। Dhruvswamini Jayshankar Prsad | ऐतिहासिक नाटक

ध्रुवस्वामिनी तथ्य एवं शिल्प Dhruvswamini Jayshankar Prsad   ध्रुवस्वामिनी तथ्य एवं शिल्प   ध्रुवस्वामिनी तथ्य एवं शिल्प – बहुमुखी प्रतिभा संपन्न श्री जयशंकर प्रसाद हिंदी के सर्वश्रेष्ठ नाटककार माने जाते हैं। उन्होंने भारत के अतीत गौरव को अपने नाटकों का विषय बनाया है तथा नाटकों की कथावस्तु प्रायः  इतिहास से…

गीत फरोश भवानी प्रसाद मिश्र।geet farosh bhwani prsad mishr | जी हाँ हुज़ूर में गीत बेचता हूँ

गीत फरोश भवानी प्रसाद मिश्र।geet farosh bhwani prsad mishr गीत फरोश (geet farosh) (भवानीप्रसाद मिश्र)     जी हाँ हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ, मैं तरह-तरह के गीत बेचता हूँ, मैं किसिम-किसिम के गीत बेचता हूँ !   जी, माल देखिए, दाम बताऊँगा, बेकाम नहीं है, काम बताऊँगा, कुछ गीत…

आलोचना की संपूर्ण जानकारी | आलोचना का अर्थ , परिभाषा व उसका खतरा

आलोचना का अर्थ  परिभाषा व उसका खतरा | आलोचना के आदर्श व उसके खतरे | Hindi notes     आलोचना का अर्थ वस्तु के यथार्थ रूप की जिज्ञासा और जानकारी उसके प्रति बौद्धिक तथा मानसिक प्रतिक्रिया चेतन मानव का स्वभाव है | यही वस्तु को समझना समझाना उसके संबंध में…

देवसेना का गीत जयशंकर प्रसाद।आह वेदना मिली विदाई व्याख्या सहित। jayshankar prsad

देवसेना का गीत जयशंकर प्रसाद।आह वेदना मिली विदाई।jayshankar prsad   देवसेना का गीत   आह ! वेदना मिली विदाई मैंने भ्रमवश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई।     छलछल थे संध्या के श्रमकण, आँसू-से गिरते थे प्रतिक्षण, मेरी यात्रा पर लेती थी नीरवता अनंत अँगड़ाई।     श्रमित स्वप्न…

भारत दुर्दशा का रचना शिल्प। bharat durdasha bhartendu harishchand | रंगशिल्प

bharat durdasha rachna shilp   भारत दुर्दशा का रचना शिल्प भारत दुर्दशा के रचना शिल्प कि यह सर्वोपरि विशेषता है कि यह राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति की दृष्टि से जितना महत्वपूर्ण है , उतना ही भाषा के प्रयोग की दृष्टि से निर्विवाद चुकी है। भारतेंदु हरिश्चंद्र भाषा के प्रति एक…

प्रगतिवाद प्रगतिशील काव्य की प्रवृतियां। prayogvad pragatishil | राष्ट्रीय आंदोलन

प्रगतिवाद के विकास क्रम पर चर्चा करते हुए प्रगतिवादी साहित्य की प्रवृतियों का उल्लेख कीजिए। प्रगतिवाद प्रगतिशील काव्य की प्रवृतियां   प्रगतिशील साहित्य का संबंध हमारे राष्ट्रीय आंदोलन से बहुत गहरा है। आजादी का आंदोलन आधुनिक साहित्य की अब तक की सभी प्रमुख प्रवृतियों को प्रेरित और प्रभावित करता रहा…