बहुत दिनों के बाद कविता व्याख्या सहित। नागार्जुन bahut dino ke baad kavita

बहुत दिनों के बाद कविता व्याख्या सहित। नागार्जुन घुमक्कड़ कभी यात्री उपनाम गांव तरौनी।   bahut dino ke bad बहुत दिनों के बाद   बहुत दिनों के बाद अब की मैंने जी-भर देखी पकी-सुनहली फसलों की मुसकान — बहुत दिनों के बाद बहुत दिनों के बाद अब की मैं जी-भर सुन पाया धान कुटती किशोरियों … Read more

प्रेमचंद के उपन्यास गोदान में आदर्शवादी दृष्टि अथवा यथार्थवाद परिलक्षित होता है

प्रश्न   – प्रेमचंद के उपन्यास गोदान में आदर्शवादी दृष्टि अथवा यथार्थवाद परिलक्षित होता है , स्पष्ट कीजिए।    प्रेमचंद के उपन्यास गोदान में आदर्शवादी दृष्टि   उत्तर – प्रेमचंद कथा और उपन्यास के सम्राट थे। प्रेमचंद का समय वही है जो कविता के क्षेत्र में छायावाद का था। एक और छायावादी कवी कविता के माध्यम से … Read more

बादलों को घिरते देखा है कविता और उसकी पूरी व्याख्या | baadlon ko ghirte dekha

बादलों को घिरते देखा कविता और उसकी पूरी व्याख्या    badlon ko ghirte dekha hai नागार्जुन   नागार्जुन का पूरा नाम वैद्यनाथ मिश्र ‘ यात्री ‘  है। उनका जन्म सन 1911 में बिहार प्रांत के दरभंगा जिले के तरौनी नामक गांव में हुआ।  उनकी प्रारंभिक शिक्षा परंपरागत रूप से संस्कृत में हुई। बाद में उन्होंने … Read more

सत्यकाम भवानी प्रसाद मिश्र। सत्यकाम की पृष्ठभूमि। bhwani prsad mishr | प्रगतिशील

सत्यकाम भवानी प्रसाद मिश्र  stykaam kavita सत्यकाम की पृष्ठभूमि – सत्यकाम पुरानी कथा पर आधारित कविता है। सत्यकाम की माता जवाला है। पौराणिक कथा में आधुनिक दृष्टि रखना ही आधुनिक कवियों की विशेषता रही है। दृष्टि में फर्क राम ,  राम ( राम निर्गुण कबीर ) , ( राम सगुण दशरथ पुत्र तुलसीदास ) ब्राह्मणों की सेवा … Read more

गोदान की मूल समस्या शहरी – ग्रामीण परिप्रेक्ष्य में।godan ki mool smasya

गोदान की मूल समस्या गोदान में प्रस्तुत विभिन्न समस्याओं का उल्लेख करते हुए बताइए कि उसकी प्रमुख समस्या क्या है ?   गोदान की मूल समस्या शहरी   उत्तर – गोदान प्रेमचंद की सर्वाधिक लोकप्रिय व कालजयी उपन्यास है इस उपन्यास को कृषकों का महाकाव्य भी कहा गया है।  सभी आलोचकों ने प्रेमचंद को कृषक और सामाजिक … Read more

पैदल आदमी कविता रघुवीर सहाय। तार सप्तक के कवि। raghuveer sahay prgtiwad

पैदल आदमी रघवीर सहाय Raghuveer shaay     जब सीमा के इस पार पड़ी थी लाशें  तब सीमा के उस पार पड़ी थीं लाशें  सिकुड़ी ठिठरी नंगी अनजानी लाशें  वे उधर से इधर आ करके मरते थे  या इधर से उधर जा करके मरते थे  यह बहस राजधानी में हम करते थे  हम क्या रुख लेंगें … Read more

ध्रुवस्वामिनी राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक चेतना। jayshankr prsad ke natak

jayshankr prsad ke natak dhruvswamini   राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक चेतना ध्रुवस्वामिनी नाटक में प्रसाद जी ने राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक चेतना का उत्कृष्ट रूप प्रस्तुत किया है। इतिहास से कथावस्तु का आधार ग्रहण करते हुए अतीत पर वर्तमान का चित्र प्रस्तुत करने मे सिद्धस्त  नाटक शिल्पी माने जाते हैं। प्रसाद जी भारत के अतीत के गौरव एवं महत्ता … Read more

ध्रुवस्वामिनी की पात्र योजना।Dhruvswamini jayshankar prsad | नाटक के पात्र

ध्रुवस्वामिनी की पात्र योजना Hindi notes । Dhruvswamini jayshankar prsad | नाटक के पात्र ध्रुवस्वामिनी की पात्र योजना     पात्र योजना की दृष्टि से भी ध्रुवस्वामिनी एक सफल नाट्य कृति मानी जा सकती है। ध्रुवस्वामिनी नाटक प्रसाद के नाटकों की तुलना में अपेक्षाकृत काम है। इस नाटक के प्रमुख पुरुष पात्र है – चंद्रगुप्त रामगुप्त शिखर … Read more

ध्रुवस्वामिनी तथ्य एवं शिल्प। Dhruvswamini Jayshankar Prsad | ऐतिहासिक नाटक

ध्रुवस्वामिनी तथ्य एवं शिल्प Dhruvswamini Jayshankar Prsad   ध्रुवस्वामिनी तथ्य एवं शिल्प   ध्रुवस्वामिनी तथ्य एवं शिल्प – बहुमुखी प्रतिभा संपन्न श्री जयशंकर प्रसाद हिंदी के सर्वश्रेष्ठ नाटककार माने जाते हैं। उन्होंने भारत के अतीत गौरव को अपने नाटकों का विषय बनाया है तथा नाटकों की कथावस्तु प्रायः  इतिहास से ग्रहण की है इसलिए वह … Read more

गीत फरोश भवानी प्रसाद मिश्र।geet farosh bhwani prsad mishr | जी हाँ हुज़ूर में गीत बेचता हूँ

गीत फरोश भवानी प्रसाद मिश्र।geet farosh bhwani prsad mishr गीत फरोश (geet farosh) (भवानीप्रसाद मिश्र)     जी हाँ हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ, मैं तरह-तरह के गीत बेचता हूँ, मैं किसिम-किसिम के गीत बेचता हूँ !   जी, माल देखिए, दाम बताऊँगा, बेकाम नहीं है, काम बताऊँगा, कुछ गीत लिखे हैं मस्ती में मैंने, … Read more