शिक्षा का अर्थ एवं परिभाषा meaning and definition of education

शिक्षा का अर्थ एवं परिभाषा – Shiksha meaning and definition in hindi

 

शिक्षा का अर्थ एवं परिभाषा

meaning and definition of education

शिक्षा का अर्थ एवं परिभाषा देने के लिए विद्वानों ने अपने – अपने मत का प्रयोग किया है। शिक्षा को विद्वानों ने अपने विचारों द्वारा परिभाषित करने का प्रयत्न किया है। किन्तु अभी तक कोई एक राय नहीं बन पाई है। आधुनिक शिक्षा शास्त्रियों और प्राचीन शिक्षा शास्त्रियों ने भी शिक्षा शब्द को संकुचित अथवा व्यापक रूप में परिभाषित करने का भरसक प्रयास किया है।

 

शिक्षा का व्यापक अर्थ ( wider meaning of education )

शिक्षा बालक के जीवन पर्यंत चलने वाली एक सतत क्रिया है। माना जाता है कि बालक अपने विशेष गुणों के साथ इस पृथ्वी पर आता है और समय परिस्थितियों के साथ – साथ अनुभव शिक्षा रूप ग्रहण करता रहता है। यह जीवन पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है। जिसके लिए व्यापक दृष्टिकोण से अवधि की सीमा निश्चित नहीं की जा सकती।

डॉक्टर ए एस अलतेकर के शब्दों में – ” वैदिक युग से लेकर आज तक भारत में शिक्षा का मूल तात्पर्य यह रहा है कि शिक्षा प्रकाश का वह स्रोत है जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हमारा सच्चा पथ प्रदर्शन करती है। ”

उपर्युक्त उदाहरण से स्पष्ट होता है कि शिक्षा जीवन पर्यंत चलने वाली एक निरंतर प्रक्रिया है। शिक्षा ग्रहण करने की कोई सीमा या अवधि नहीं है व्यक्ति जब तक शिक्षा ग्रहण करना चाहता है कर सकता है।

 

शिक्षा प्रकाश का स्रोत –

शिक्षा व्यक्ति के जीवन के लक्ष्य को निर्धारित करता है। शिक्षा से तात्पर्य प्रकाश देने वाले या दिव्य आलोक प्रदान करने वाले तत्व से है। शिक्षा से ज्ञान अर्जित किया जाता है , ज्ञान मनुष्य के तीसरे नेत्र के समान है। ज्ञान पाकर व्यक्ति अपने सही गलत की पहचान स्वयं कर सकता है और निष्कपट भाव से अपना जीवन यापन कर सकता है। वैदिक काल में शिक्षा का मूल आधार मोक्ष की प्राप्ति थी। मोक्ष की प्राप्ति तभी संभव है , जब व्यक्ति को ज्ञान का प्रकाश मिले। ज्ञान के अभाव में मनुष्य पशु के समान रहता है , ज्ञान प्राप्ति के बाद मानव अपने जीवन के महत्व और उसके उद्देश्यों को समझ कर उसका अनुकरण करता है। ज्ञान प्राप्ति के उपरांत व्यक्ति ज्ञान मार्ग पर चलकर मोक्ष प्राप्ति कर सकता है।

 

शिक्षा का सतत विकास –

निश्चित रूप से शिक्षा जीवन पर्यंत चलने वाली एक सतत प्रक्रिया है। मानव जीवन में शिक्षा का अंत कभी नहीं है आरम्भ से अंत तक शिक्षा का महत्व है। शिक्षा आत्म विकास तथा आत्म सुधार की प्रक्रिया है , जो जीवन पर्यंत चलती है। शिक्षा द्वारा व्यक्ति का निरंतर सुधार तथा संस्कार होता है। व्यक्ति शिक्षा ग्रहण जीवन पर्यंत करता है जिसके कारण वह जीवन भर एक शिक्षार्थी रहता है और शिक्षा के रूप को निरंतर समाज के अनुरूप तैयार किया जाता है। शिक्षा विहीन मनुष्य पशु के समान माना गया है। शिक्षा प्राप्त व्यक्ति जीवन के लक्ष्य को निर्धारित कर मोक्ष प्राप्ति के लिए अग्रसर रहता है।

शिक्षा का संकुचित अर्थ  ( narrower meaning of education )

समय के साथ शिक्षा के लक्ष्य भी बदला है वैदिक काल में शिक्षा केवल ब्राह्मणो के लिए हुआ करती थी जिसको प्राप्त करने के लिए गरूकुल में रहकर गुरु द्वारा ग्रहण किया जाता था यह शिक्षा का संकुचित रूप ही था जंहा शिक्षा का सिमित दायरा था।
वर्तमान में औपचारिक रूप से तथा अनौपचारिक दोनों रूप से शिक्षा का महत्व काफी बढ़ गया है। शिक्षा आज आजीवका का एक साधन भी है। आज शिक्षा समाज का निर्माण करने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। जिस प्रकार की शिक्षा समाज को मिलती है उस प्रकार का समाज निर्मित होता है।

 

निष्कर्ष –

समग्रतः कहा जा सकता है कि शिक्षा का उद्देश समय के साथ बदलता रहता है शिक्षा समाज निर्माण का एक माध्यम है बिना सही शिक्षा के आदर्श समाज की स्थापना नहीं किया जा सकता है।आज शिक्षा न केवल जीविका चलने के लिए है बल्कि मोक्ष प्राप्ति का भी एक साधन है।

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